हनुमान चालीसा पढ़ने से पहले स्वच्छता और एकाग्रता बहुत जरूरी है। सुबह जल्दी या मंगलवार-शनिवार का समय सबसे शुभ माना जाता है। पाठ के लिए साफ कपड़े पहनें और हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठें। पाठ करते समय मन को शांत रखें और केवल हनुमान जी पर ध्यान केंद्रित करें। इसे शब्दों के लिए नहीं बल्कि श्रद्धा और विश्वास के साथ पढ़ें। 11, 21 या 41 बार पाठ करना शुभ माना जाता है। पाठ के बाद हनुमान जी को प्रणाम करके सीताराम जाप करना भी लाभकारी है।
श्री हनुमान चालीसा
दोहा :
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
चौपाई :
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरी लंक जरावा॥
भीम रूप धरी असुर संहारे।
रामचंद्र के काज सवारे॥
लाय संजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
दोहा :