प्रसिद्ध हिंदी लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता Vinod Kumar Shukla का 23 दिसंबर को 89 साल की उम्र में निधन। जानिए उनके जीवन, उपलब्धियां और पीएम मोदी समेत नेताओं ने जताया शोक।“
Vinod Kumar Shukla का निधन: हिंदी साहित्य में अपूरणीय क्षति
प्रसिद्ध हिंदी लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता Vinod Kumar Shukla का 23 दिसंबर 2025 को 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे शाश्वत शुक्ल ने दी। साहित्य जगत के लिए यह एक गहरा नुकसान है, क्योंकि Vinod Kumar Shukla ने हिंदी साहित्य में अमूल्य योगदान दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 1 नवंबर को उनसे बातचीत की थी और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। Vinod Kumar Shukla के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा शाश्वत और एक बेटी शामिल हैं।
स्वास्थ्य और अंतिम समय
शाश्वत शुक्ल ने बताया कि अक्टूबर 2025 में सांस लेने में कठिनाई के कारण लेखक को रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ समय बाद स्वास्थ्य में सुधार होने के कारण उन्हें घर भेज दिया गया।
हालांकि, 2 दिसंबर को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान शाम 4:58 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शाश्वत ने यह भी बताया कि उनका पार्थिव शरीर पहले उनके निवास स्थान ले जाया जाएगा, और अंतिम संस्कार की जानकारी जल्द दी जाएगी।
साहित्यिक योगदान और पुरस्कार
Vinod Kumar Shukla ने हिंदी साहित्य को कई अमूल्य रचनाएँ दीं। उनके प्रमुख उपन्यासों में शामिल हैं:
नौकर की कमीज
खिलेगा तो देखेंगे
दीवार में एक खिड़की रहती थी
एक चुप्पी जगह
इन रचनाओं के लिए उन्हें 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें 2024 में उनके रायपुर निवास पर आयोजित समारोह में प्रदान किया गया था। Vinod Kumar Shukla छत्तीसगढ़ के पहले लेखक बने जिन्होंने भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान जीता।
नेताओं ने जताया शोक
प्रसिद्ध साहित्यकार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया:
“ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक Vinod Kumar Shukla जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ। हिन्दी साहित्य जगत में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी शोक व्यक्त किया:
“छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरोहर, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता Vinod Kumar Shukla जी का जाना अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनाएँ और योगदान हमेशा स्मरणीय रहेंगे।”
कांग्रेस नेताओं ने भी शोक जताते हुए ईश्वर से उनके परिवार को दुःख सहने की शक्ति देने की कामना की।
Vinod Kumar Shukla ने अपने साहित्यिक जीवन में सरलता और मानव संवेदनाओं को केंद्र में रखा। उनकी लेखनी समाज और जीवन की गहरी समझ प्रस्तुत करती है। उनकी पुस्तकें और लेख आज भी पाठकों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।